डालें पलाश की फूट पड़ी …
मैने तो यह गुन रक्खा था जब साँस बसंती आएगी,
तब अपने सौ अरमानों में वा साथ तुम्हे भी लाएगी,
पत्ते-पत्ते ने टूट यही मेरे कानों में बात कही,
कब समझा था मेरी आशा यों अपने मुँह की खाएगी,
यह सोच बहार नही आई, धोखे में अपने को रक्खा;
सहसा रोमवलि सिहर उठी प्रिय छूट गया धीरज मेरा
डालें पलाश की फूट पड़ी प्रिय छूट गया धीरज मेरा
मैने तो यह गुन रक्खा था जब भ्रिन्गो की ध्वनि गूंजेगी,
तब नीरव रातों में सेई मेरी साधें भी पूज़ेंगी,
हर गूंगे स्वर के अंदर से स्वर एक निरंतर सुनता था,
रुनझुन करती वा आती है जो पीर तुम्हारी बूझेगी
कितना कानों को रूंधूं मैं बौरे आमों पर बौर आए;
भौरों की पाँते टूट पड़ी प्रिय छूट गया धीरज मेरा
डालें पलाश की फूट पड़ी प्रिय छूट गया धीरज मेरा
शाखों ने कल्ले फोड़े पर देरी उनके हरियाने में,
कुछ काल अभी तक बाकी है सचमुच मधुरुत के आने में,
अलि आतुर गंध-पराग रहित कलियों से भी बँध जाते है,
मान मान विलंब अभी कुछ है खगकुल के खुल कर गाने में,
अपने को बहला रखने की आख़िर कुछ हद भी होती है;
कोयल कुहकुह कर कूक पड़ी प्रिय छूट गया धीरज मेरा
डालें पलाश की फूट पड़ी प्रिय छूट गया धीरज मेरा |
moti lal sharma (chack) said
jo jingi se aashavan hota hai
wahi es duniya me mahan hota hai
kya huya tut gayi aasha
jo na mane har
uske kadmo me hi to jahan hota hai.
moti lal sharma (chack) said
kismat wale hai wo log jin ko payar yad aata hai,
socho unke bare jinko pyar kabhi nahi pata hai,
yadi ho jaye jiwan payer kabhi unhe ,
to kai hawa ka jhonka usko chura le jata hai.