मंथन

सत्य के पीछे का सच

कुमार-विश्वास (मुक्तक)

 

बहुत बिखरा बहुत टूटा थपेड़े सह नही पाया
हवाओं के इशारों पर मगर मै बह नही पाया
अधूरा अनसुना ही रह गया यूँ प्यार का क़िस्सा
कभी तुम सुन नही पाई कभी मै कह नही पाया


***


मै जब भी तेज़ चलता हूँ नज़ारे छूट जाते हैं
कोई जब रूप गढ़ता हूँ तो साँचे टूट जाते हैं
मै रोता हूँ तो आकर लोग कंधा थपथपाते हैं
मैं हँसता हूँ तो अक्सर लोग मुझसे रूठ जाते हैं

 

***


कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है
मगर धरती की बेचैनी तो बस बादल समझता है
मै तुझसे दूर कैसा हूँ तू मुझसे दूर कैसी है
ये तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता है

 

***

मोहब्बत एक अहसासों की पावन सी कहानी है
कभी कबिरा दीवाना था कभी मीरा दीवानी है
यहा सब लोग कहते है मेरी आँखों में आँसू है
जो तू समझे तो मोती है जो ना समझे तो पानी है


***

 

जिसकी धुन पर दुनिया नाचे, दिल एक ऐसा इकतारा है,
जो हमको भी प्यारा है और, जो तुमको भी प्यारा है.
झूम रही है सारी दुनिया, जबकि हमारे गीतों पर,
तब कहती हो प्यार हुआ है, क्या अहसान तुम्हारा है.

 

 

***

 

जो धरती से अम्बर जोड़े , उसका नाम मोहब्बत है ,
जो शीशे से पत्थर तोड़े , उसका नाम मोहब्बत है ,
कतरा कतरा सागर तक तो ,जाती है हर उमर मगर ,
बहता दरिया वापस मोड़े , उसका नाम मोहब्बत है .

 

 

***

 

पनाहों में जो आया हो, तो उस पर वार क्या करना ?
जो दिल हारा हुआ हो, उस पे फिर अधिकार क्या करना ?
मुहब्बत का मज़ा तो डूबने की कशमकश में हैं,
जो हो मालूम गहराई, तो दरिया पार क्या करना ?

 

 

***

 

बस्ती बस्ती घोर उदासी पर्वत पर्वत खालीपन,
मन हीरा बेमोल बिक गया घिस घिस रीता तनचंदन,
इस धरती से उस अम्बर तक दो ही चीज़ गज़ब की है,
एक तो तेरा भोलापन है एक मेरा दीवानापन.

 

 

***

 

तुम्हारे पास हूँ लेकिन जो दूरी है समझता हूँ,
तुम्हारे बिन मेरी हस्ती अधूरी है समझता हूँ,
तुम्हे मै भूल जाऊँगा ये मुमकिन है नही लेकिन,
तुम्ही को भूलना सबसे ज़रूरी है समझता हूँ

19 Responses to “कुमार-विश्वास (मुक्तक)”

  1. Dr. Ishwer Singh said

    कुमार विश्‍वास के गीत और मुक्‍तकों का मैं बहुत बड़ा प्रशंसक हूं। उनके गीतों में भावनाओं को अभिव्‍यक्‍त करने के लिए शब्‍दों का चयन बेहद प्रभावकारी एवं सटीक होता है। उनका प्रस्‍तुतीकरण, शैली और गायन एकदम बेहतरीन और मन को भाने वाला होता है। मैंने उन्‍हें अनेक बार मंच से सुना है। मैं अक्‍सर कवि सम्‍मेलनों में उनके मुक्‍तक कागज पर नोट करके लाया करता था। मंच से प्रस्‍तुत उनके उनेक मुक्‍तक मुझे याद हैं। मैं उन्‍हें अकेले में अक्‍सर गुनगुनाता हूं। ये मुक्‍तक अनेक बार भावनात्‍मक संबल प्रदान करते हैं।

  2. saurabh said

    dr kumarur usko prastut karn vishwas ki kavita aur prastut karne ki shaile adbhud hai

  3. bht khoob sahab;

  4. naam galat chala gaya apke muktako ne aisa diwana banaya.

  5. mere paas shabd nahi hai bhai aapke liye…………..
    aapki kavitoo ke liye

  6. anand jain said

    mai to hamesh aap ke kavitaoka diwana hu

  7. Raj nandan said

    bahut khub sir jee kya aapne likha hai

    i like your poem sir jee

  8. राहुल सिँह said

    प्रस्तुत मुक्तक कवि की अनुभूति और अभिव्यक्ति का अच्छा प्रमाण हैँ

  9. saurabh said

    कुमार विश्वास जी के बारे मे कुछ भी कहना कम है ,जैसा की सूरज को दिया दिखाने के बराबर है मैने उनकी पगली लड्की और कोई दिवाना कहता है it is so fantastic. i am so inspired to kumaar sir and write an कविता US LADKI KE BIN इसमे एक feeling hai samjhne ki koshis kijiega
    thanks………..
    all t best KUMAAR SIR

  10. बहुत ही सुंदर रचना|बहुत बिखरा बहुत टूटा थपेड़े सह नही पाया……..कह नही पाया|

  11. मैं हंसता हूँ तो अक्सर लोग मुझसे रूठ जाते है “जिन्दगी की हकीकत है | विशवास साहब गहरी पकड़ रखते है रिस्तो पर –बिंदु जैन

  12. moti lal said

    “duniya me hamne lage kaviyon ke male dekhe hai,
    paise dekar karte kaviyo ko log bhele dekhe hai,
    jinke piche lage logo ke mele aese hamne
    kumar jaise kavi akele dekhe hai.”

  13. shubham sharma said

    sir mai shubham sharma from morena(m.p.) mai aapke muktakon ko itna pasand karta hoo. ki sayad is juban se bakhan nahi kar skta

    THANK YOU

    isi tarah likhte raho to hamari life mai kabhi koi tenson aayegi to vo aapke muktak pad ke door ho jayegi……………………….

    THANK YOU

  14. Akash Singhai said

    Bahut Badia Sir, Aap ki soch bahut garhai me le jati hai.

  15. sir bahut acchai hai kavitayen

  16. sir mai kanpur se hu my name prabhat tripathi
    aapke muktako ka kya kahna

  17. ankit said

    Main aapka bahut bada fan u sir.
    Kya likhte hain aap.
    Sedhe dil ko chu jata hai..
    Duwa yahi hai sir k aap uhi likhte rahe…

  18. satendra shukla said

    viswas ji aap bas aap aage chle chlen hum saath hi hin hindustani

  19. ramgopal sharma said

    अंग्रेजी लाख कोशिशे कर आज के युवाओँ का मन भरमा दे लेकिन हिँदी अहसानमंद है आप जैसे कवियो की.जो पटरी से उतरते युवाओँ को हिंदी का मोह छोङने नही देते।धन्यवाद रामगोपाल शर्मा 99500459150 ramgopaltodani@ yahoo.com

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